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किसानों के आगे झुके मोदी, तीनों कृषि कानून लिए वापस

गुरुनानक देव की जयंती प्रकाश पर्व पर पीएम मोदी ने किया बड़ा ऐलान

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नई दिल्ली: एक साल तक लगातार विरोध के बाद आखिर मोदी सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए हैं। आज शुक्रवार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने करीब 18 मिनट के संबोधन में यह बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि हम किसानों के हित के लिए यह कानून लाए थे, लेकिन किसानों को समझाने में हम नाकाम रहे। वहीं, देशभर के किसानों की कहीं न कहीं यह बड़ी जीत है। किसान गर्मी, ठंड, बारिश की परवाह किए बगैर लगातार अपनी आवाज बुलंद करते गए। अब विभिन्न राज्यों में होने जा रहे चुनाव से पहले मोदी सरकार ने किसानों के इस आंदोलन की आग को कम करने का काम किया है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मेरे प्यारे देशवासियों आज देव दीपावली का पावन पर्व है। आज गुरुनानक देव जी का भी पावन प्रकाश पर्व है। मैं विश्व में सभी लोगों और सभी देशवासियों को बधाई देता हूं। यह भी बेहद सुखद है कि डेढ़ साल बात करतारपुर साहिब कॉरिडोर फिर से खुल गया है। गुरुनानक देव जी ने कहा है कि संसार में सेवा का मार्ग अपनाने से ही जीवन सफल होता है। हमारी सरकार इसी सेवा भावना के साथ देशवासियों का जीवन आसान बनाने में जुटी है। न जाने कितनी पीढ़ियां जिन सपनों को सच होते देखना चाहती थीं, भारत उन्हें साकार करने की कोशिश कर रहा है।

इन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे किसान

आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020
इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट से हटाने का प्रावधान है। सरकार के मुताबिक, इससे किसानों को उनकी फसल की सही कीमत मिल सकेगी, क्योंकि बाजार में कॉम्पिटीशन बढ़ेगा।

कृषक (सशक्तिकरण-संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020
इस कानून में कृषि करारों (एग्रीकल्चर एग्रीमेंट) पर नेशनल फ्रेमवर्क का प्रावधान किया गया है। ये कृषि उत्पादों की बिक्री, फार्म सेवाओं, कृषि बिजनेस फर्म, प्रोसेसर्स, थोक और खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जोड़ता है। इसके साथ किसानों को क्वालिटी वाले बीज की आपूर्ति करना, फसल स्वास्थ्य की निगरानी, कर्ज की सुविधा और फसल बीमा की सुविधा देने की बात इस कानून में है।

कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020
इस कानून में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रावधान है, जहां किसानों और कारोबारियों को मंडी के बाहर फसल बेचने की आजादी होगी। कानून में राज्य के अंदर और दो राज्यों के बीच कारोबार को बढ़ावा देने की बात कही गई है। साथ ही मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम करने की बात भी इस कानून में है।

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