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PFI Ban in India: विदेशी खुफिया एजेंसियों का मोहरा बन चुका था PFI, अभी खुलेंगे कई और राज!

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दिल्ली पुलिस के पूर्व स्पेशल सीपी एवं ईडी के निदेशक रह चुके करनैल सिंह मानते हैं कि पीएफआई की गतिविधियां संदिग्ध रही हैं। जांच एजेंसियों को इस बाबत काफी सबूत मिले हैं। इस संगठन पर बहुत समय पहले ही बैन लग जाना चाहिए था। करीब दो दर्जन राज्यों में पीएफआई एवं इसके सहयोगी संगठनों की पहुंच रही है।

आतंकी समूहों से रहे हैं PFI के संबंध:

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा नोटिफिकेशन में कहा गया है कि पीएफआई के फाउंडिंग मेंबर्स, सिम्मी से जुड़े रहे हैं। ये संगठन भारत में प्रतिबंधित है। जमात-उल-मुजाहिदीन, बांग्लादेश इसके साथ भी पीएफआई के संबंध बताए जाते हैं। इस संगठन पर भी बैन लगा है। दिल्ली पुलिस के पूर्व स्पेशल सीपी एवं ईडी के निदेशक रह चुके करनैल सिंह मानते हैं कि पीएफआई की गतिविधियां संदिग्ध रही हैं। जांच एजेंसियों को इस बाबत काफी सबूत मिले हैं। इस संगठन पर बहुत समय पहले ही बैन लग जाना चाहिए था। करीब दो दर्जन राज्यों में पीएफआई एवं इसके सहयोगी संगठनों की पहुंच रही है। विदेशी खुफिया एजेंसियां, ऐसे संगठनों को ही मोहरा बनाकर देश में तोड़फोड़ की साजिश रचती हैं। हिजबुल मुजाहिदीन का उदाहरण सामने हैं। पाकिस्तान की आईएसआई ने भारत के खिलाफ इस संगठन का जमकर इस्तेमाल किया है। हिजबुल मुजाहिद्दीन को भारत ही नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ सहित अमेरिका भी आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है। इस संगठन की कमान सैयद सलाहुद्दीन के हाथ में है जो पाकिस्तान में बैठकर अपनी आतंकी गतिविधियों का संचालन करता है। इन सबके मद्देनजर, पीएफआई पर प्रतिबंध लगाना बहुत जरूरी था।

वैश्विक आतंकी समूहों से जुड़ गया PFI:

आईएसआईएस जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से पीएफआई का मेलजोल काफी ज्यादा बढ़ गया था। संगठन के कुछ सदस्यों ने आईएसआईएस ज्वाइन भी कर लिया। आतंकी गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग की बात होने लगी। बाद में यह साबित हो गया कि पीएफआई और उसके संगठन, सार्वजनिक तौर पर एक सामाजिक आर्थिक व राजनीतिक संगठन के रूप में कार्य करते रहे हैं। यह संगठन अपने एक गुप्त एजेंडे के आधार पर समाज के एक वर्ग को कट्टर बनाकर लोकतंत्र की अवधारणा को कमजोर कर रहा था। इसके सदस्य देश के संवैधानिक प्राधिकार और संवैधानिक ढांचे के प्रति घोर अनादर दिखाते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि पीएफआई की हकरतें, देश की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा के प्रतिकूल हैं। इनसे शांति तथा साम्पद्रायिक सदभाव का माहौल खराब होने और देश में उग्रवाद को प्रोत्साहन मिलने की आशंका है।

देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना PFI:

पीएफआई, कई तरह के आपराधिक और आतंकी मामलों में शामिल रहा है। बाहरी स्रोतों से प्राप्त धन और वैचाारिक समर्थन के बल पर यह संगठन, देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। इस संगठन के कुछ सदस्य, अंतरराष्ट्रीय आतंकी समूहों से जुड़े रहे हैं। इसके सदस्य, सीरिया, ईराक और अफगानिस्तान में आतंकी कार्यकलापों में भाग ले चुके हैं। इन जगहों पर पीएफआई के कई सदस्य मारे भी गए हैं। पीएफआई व इसके सहयोगी संगठन, आपराधिक षडयंत्र के तहत भारत के अंदर और बाहर से धन एकत्रित कर रहे हैं। एनआईए एवं सहयोगी एजेंसियों की छापेमारी के बाद सरकार ने इस संगठन को बैन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित केंद्र सरकार में कई मंत्री पीएफआई की संदिग्ध गतिविधियों पर सवाल खड़े कर चुके हैं। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पीएफआई के संदर्भ में कहा, केरल आतंकवाद और कर्ज जाल का गढ़ बन गया है। केरल में सांप्रदायिक तनाव बढ़ रहा है। यहां पर जो लोग हिंसा करते हैं, उन्हें वाम सरकार का मौन समर्थन हासिल है।

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