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उत्तराखंड में इस बार थीम आधारित पौधारोपण, हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे धार्मिक स्थलों में रोपे जाएंगे रुद्राक्ष के पौधे

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Dehradun:  उत्तराखंड में इस बार वन विभाग के तत्वावधान में होने वाला वर्षाकालीन पौधारोपण नए कलेवर में दिखेगा, जो ‘आओ प्रकृति से जुड़ें’ थीम पर आधारित होगा। इसके अंतर्गत जंगलों में 20 प्रतिशत से अधिक फलदार प्रजातियां लगाई जाएंगी। साथ ही नगरीय क्षेत्रों में हरिद्वार, ऋषिकेश जैसे धार्मिक स्थलों में रुद्राक्ष के पौधे लगाए जाएंगे तो चारधाम में वहां की पारिस्थितिकी के हिसाब से धार्मिक महत्व रखने वाली वृक्ष प्रजातियों के पौधों का रोपण होगा।

यही नहीं, पर्यटक स्थलों को जोड़ने वाले मार्ग भी हरे-भरे और फूलों से लकदक नजर आएंगे। इसके लिए वहां शोभादार और पुष्प प्रजातियों के पौधे रोपित किए जाएंगे।

वर्षाकालीन पौधारोपण के अंतर्गत वन विभाग ने इस बार 1.42 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। वन क्षेत्रों में 14 हजार हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे तो नगरीय पौधारोपण कार्यक्रम में विभिन्न नगरों, कस्बों व सड़कों के किनारे पौधरोपण किया जाना है। विभागीय मंत्री सुबोध उनियाल के निर्देश पर विभाग ने इस बार पौधरोपण को थीम पर आधारित बनाने का निश्चय किया है।

विभाग के मुखिया प्रमुख मुख्य वन संरक्षक विनोद कुमार सिंघल के अनुसार वन क्षेत्रों में होने वाले पौधारोपण में फलदार प्रजातियों का रोपण करने से आने वाले दिनों में बंदर, लंगूर जैसे जानवरों के लिए जंगल में भोजन की उपलब्धता बनी रहेगी। साथ ही कुछ क्षेत्रों में हरड़, बहेड़ा, आंवला जैसी औषधीय महत्व की प्रजातियों का रोपण भी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि नगरीय पौधारोपण में धार्मिक स्थलों में जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए धार्मिक महत्व के पौधे रोपने का लक्ष्य है। इसके पीछे आमजन को पौधारोपण और रोपित पौधों के संरक्षण से जोड़ने की मंशा है। उन्होंने जानकारी दी कि जौलीग्रांट एयरपोर्ट से पहाड़ों की रानी मसूरी को जोड़ने वाले मार्ग पर अमलतास, जकरंदा, सीरस, पारिजात, चंपा, पलास जैसी शोभादार व रंग-विरंगे पुष्पों वाली प्रजातियां रोपी जाएंगी। इसी तरह का पौधारोपण अन्य पर्यटन स्थलों और उन्हें जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर किया जाएगा।

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