उत्तराखंड

Uttarakhand: दो हादसे के बाद खुली System की पोल..कंट्रोल रूम के हर पन्ने के आंकड़ों में झोल!

Listen to this article

आपदा की दृष्टि से संवेदनशील प्रदेश में जब भी कोई बड़ी विपदा आती है, लोगों का पहला ध्यान आपदा प्रबंधन विभाग की ओर जाता है। विभाग के पास सुरक्षा और बचाव के अलावा संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए सही सूचनाओं का आदान-प्रदान करने की जिम्मेदारी भी है। लेकिन उत्तराखंड में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (कंट्रोल रूम) अपनी इस भूमिका का सही से निवर्हन नहीं कर पा रहा है।

देवभूमि उत्तराखंड में हुई दो बड़ी आपदाओं के बाद कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली है। कंट्रोल रूम में नियमित स्टाफ के अलावा शासन की ओर से प्रतिदिन तमाम लाइन विभागों के नोडल अधिकारियों की ड्यूटी तय रहती है। पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जता चुके हैं।

लापता के परिजनों को 24 घंटे बाद भी नहीं दी गई सूचना:

उत्तरकाशी में हिमस्खलन की चपेट में आए लापता 28 लोगों के परिजनों को 24 घंटे बाद भी कोई सूचना शासन-प्रशासन या निम प्रशासन की ओर से नहीं दी गई। अमर उजाला ने लापता लोगों के परिजनों से एक-एक कर फोन पर बात की तो सभी ने इस बात की शिकायत दर्ज कराई। बुधवार को लापता लोगों के तमाम परिजन कोई देहरादून तो कोई उत्तरकाशी में अपनों की तलाश में भटकता रहा। उन्हें किसी ने भी सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। ऐसे में उत्तरकाशी के मातली पहुंचे सीएम धामी से भी लोगों ने अपनों के बारे में जानना चाहा।

कंट्रोल रूम के हर पन्ने के आंकड़ों में झोल:

हिमस्खलन की घटना में कितने लोग हताहत हुए, कितने लापता हैं, कितने किस स्थिति में हैं। इन बातों के सही जवाब न तो उत्तरकाशी जिला प्रशासन और न ही राज्य आपातकालीन कंट्रोल रूम दे पा रहा है। वहीं, पौड़ी की बस दुर्घटना में बुधवार शाम सवा सात बजे अपर जिलाधिकारी गढ़वाल इला गिरी ने 32 लोगों के मारे जाने की सूचना दी। राज्य कंट्रोल रूम की ओर से साढ़े आठ बजे के आसपास जो सूचना प्रेषित की गई, उसमें मृतकों की संख्या 19 बताई गई। इस तरह से मीडिया को भी सही जानकारी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे लोगों की बीच भ्रम की स्थिति बन रही है।

Show More

Related Articles

Back to top button
उत्तराखंड
राज्य
वीडियो